जब भी मौका मिले,
घर ज़रूर चले जाना,
घर जा कर माँ के
आँचल में सो जाना,
उनको थपकी देते हुए
नींद में खो जाना ,
सारी दौलत एक तरफ,
तुम हो उनका खज़ाना |
शाम को उनका मन पसंद
गाना गुनगुनाना,
जब मौका मिले तो प्यार से
बाबा को गले लगाना,
तुम बस उनके पास ही हो ,
यह एहसास दिलाना ,
जब भी मौका मिले तो
घर ज़रूर चले जाना |
बेवजह ही उन्हें देखकर
मंद-मंद मुस्कुराना,
तुम्हारी आँखें हैं
उनके लिए पूरा ज़माना,
वक़्त निकाल उनके साथ
खूब खिलखिलाना,
जब भी मौका मिले,
घर ज़रूर चले जाना |
जहाँ भी रहो, जो भी करो,
बस उनका सम्मान बढ़ाना ,
ध्यान रहे उनकी आँखों में
कभी आँसू ना लाना ,
क्षणिक है ये जीवन,
इसे व्यर्थ की भागदौड़ में
मत गवाना ,
जब भी मौका मिले,
घर ज़रूर चले जाना |
आँचल चौधरी

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