Monday, March 8, 2010

याद
क्या बतलाऊं तुम्हे कि
तुम्हे कितना याद करती हूँ I

हर आहट पर ठहर जाती हूँ ,
कि लगता है तुम आने वाले हो I
शाम होते ही सवार जाती हूँ ,
कि लगता है तुम आने वाले हो I

पलके भी नहीं झपंकने देती हूँ,
कि लगता है तुम आने वाले हो I

रात सोते हुए हुड़क जाती हूँ
कि लगता है तुम आने वाले हो I

क्या बतलाऊं तुम्हे कि
तुम्हे कितना याद करती हूँ I


हर ज़र्रे से पुचा करती हूँ
कि क्या तुम आने वाले हो I
कण -कणमें ढूंढा करती हूँ
कि क्या तुम आने वाले हो I
सूरज की पहली किरण से सवाल करती हूँ
कि क्या तुम आने वाले हो I
रात की ख़ामोशी में सोचा करती हूँ

कि क्या तुम आने वाले हो I


क्या बतलाऊं तुम्हे कि
तुम्हे कितना याद करती हूँ I

Saturday, March 6, 2010

भीगी बरसात में

भीगी बरसात में
बादल गरजा, बिजली कडकी , भीगी मै बरसात में I
घटाओं ने रुख बदला और आ गये हम तुम साथ में I
भीनी फिजाओं में उड़ता आँचल पकड़ा तुमने हाथ में I
यू ही शर्मा जाती हूँ ये सोच कर कि कैसे तुम पास
आओगे पहली मुलाकात में I

कैसा ये सावन छाने लगा है, कि अरमान मचलते हैं ऐसे हालात में I
कैसे तुम्हे पास बुलाऊं कि मन की शेरनी बैठी है इसी घात में I
ये कैसा जादू है तुम्हारा की ढूढने लगी हूँ तुम्हे हर बात में I
तेरी याद में इस कदर डूबी हूँ कि जैसे अँधेरा रात में I


बादल गरजा, बिजली कडकी , भीगी मै बरसात में I
घटाओं ने रुख बदला और आ गये हम तुम साथ में I

आँचल चौधरी