Wednesday, March 27, 2013

गर्व है मुझे




अदम्य  शक्ति , अपार ममता का संग्रचना स्वरुप हूँ मैं ,
वात्सल्य की मूरत , असीम प्रेम का नीरज हूँ मैं I

जीवन का सृजन -पोषण करती मैं निश्चला ,
जन-समूह को परिवार  बनाती हूँ मैं I

 कवि  की कल्पना  का जीवन्त रूप हूँ मै ,
जीवन में सौम्यता व सॉन्दर्य का  रूपक  हूँ मै ,
इस श्रुष्टि की कलात्मक  रचयिता हूँ मै

ज्ञान की देवी , वीणा स्वर सुसज्जित सरस्वती हूँ मैं ,
प्रचण्ड देवीय शक्ति का रूप दुर्गा हूँ मै ,
दुष्ट -पापीयों का संघार करती , चंडी का रूप हूँ मै


मात्र एक जीवन, मात्र एक जीवन में है अनेक अवतार ,
बेटी, बहन , बहू  और माँ बन जन-जीवन पूण  करती हूँ  मैं I
गृह सेवा  में निरंतर प्रयत्नशील , निष्ठापूर्ण  तपस्वी हूँ मै
चार दिवारी को घर बनाने वाली कुशल गृहणी हूँ मै 

पुरुष  प्रधान समाज  की बेड़ियों से ग्रसित  संसार मैं ,
नित्य अटूट साहस से आगे बढ़ती वीरांगना हूँ मैं I

भेद -भाव , अत्याचार , प्रताड़ना अन्याय से जूझती मैं निर्भय ,
सदियों से से चले आ रहे शोषण में सुलगती , दहेज़ की आग में तपती ,
उदारता की मिसाल , सहन -शक्ति की निर्मल सरिता हूँ मैं I

जीवन की विसंगतियों ने विवश किया मुझे ,
अपने आपको सिद्ध करने  को बार-बार ,
पीड़ा सहते हुए भी हर विसंगति पर वज्र -प्रहार करती हूँ मैं  I

जिंदगी मेरी है बस औरों के लिए समर्पित ,
इस धरा को वसुन्धरा करती हूँ मैं I

गर्व है मुझे , गर्व है मुझे ,
एक महिला हूँ मैं I


आँचल चौधरी