अदम्य शक्ति , अपार ममता का संग्रचना स्वरुप हूँ मैं ,
वात्सल्य की मूरत , असीम प्रेम का नीरज हूँ मैं I
जीवन का सृजन -पोषण करती मैं निश्चला ,
जन-समूह को परिवार बनाती हूँ मैं I
कवि की कल्पना का जीवन्त रूप हूँ मै ,
जीवन में सौम्यता व सॉन्दर्य का रूपक हूँ मै ,
इस श्रुष्टि की कलात्मक रचयिता हूँ मै
ज्ञान की देवी , वीणा स्वर सुसज्जित सरस्वती हूँ मैं ,
प्रचण्ड देवीय शक्ति का रूप दुर्गा हूँ मै ,
दुष्ट -पापीयों का संघार करती , चंडी का रूप हूँ मै
मात्र एक जीवन, मात्र एक जीवन में है अनेक अवतार ,
बेटी, बहन , बहू और माँ बन जन-जीवन पूण करती हूँ मैं I
गृह सेवा में निरंतर प्रयत्नशील , निष्ठापूर्ण तपस्वी हूँ मै
चार दिवारी को घर बनाने वाली कुशल गृहणी हूँ मै
पुरुष प्रधान समाज की बेड़ियों से ग्रसित संसार मैं ,
नित्य अटूट साहस से आगे बढ़ती वीरांगना हूँ मैं I
भेद -भाव , अत्याचार , प्रताड़ना अन्याय से जूझती मैं निर्भय ,
सदियों से से चले आ रहे शोषण में सुलगती , दहेज़ की आग में तपती ,
उदारता की मिसाल , सहन -शक्ति की निर्मल सरिता हूँ मैं I
जीवन की विसंगतियों ने विवश किया मुझे ,
अपने आपको सिद्ध करने को बार-बार ,
पीड़ा सहते हुए भी हर विसंगति पर वज्र -प्रहार करती हूँ मैं I
जिंदगी मेरी है बस औरों के लिए समर्पित ,
इस धरा को वसुन्धरा करती हूँ मैं I
गर्व है मुझे , गर्व है मुझे ,
एक महिला हूँ मैं I
आँचल चौधरी
