Saturday, May 27, 2017

घर ज़रूर चले जाना





जब भी मौका मिले,
घर ज़रूर चले जाना,
घर जा कर माँ  के
आँचल में सो जाना,
उनको थपकी देते हुए
नींद में खो जाना ,
सारी दौलत एक तरफ,
तुम हो उनका खज़ाना |

शाम को उनका मन पसंद
गाना गुनगुनाना,
जब मौका मिले तो प्यार से
बाबा को गले लगाना,
तुम बस उनके पास ही हो ,
यह एहसास दिलाना ,
जब भी मौका मिले तो
घर ज़रूर चले जाना |

बेवजह ही उन्हें देखकर
मंद-मंद मुस्कुराना,
तुम्हारी आँखें हैं
उनके लिए पूरा ज़माना,
वक़्त निकाल उनके साथ
खूब खिलखिलाना,
जब भी मौका मिले,
घर ज़रूर चले जाना |

जहाँ भी रहो, जो भी  करो,
बस उनका सम्मान बढ़ाना ,
ध्यान रहे उनकी आँखों में
कभी आँसू ना लाना ,
क्षणिक है ये जीवन,
इसे व्यर्थ की भागदौड़ में
मत गवाना ,
जब भी मौका मिले,
घर ज़रूर चले जाना |


आँचल  चौधरी



Wednesday, May 17, 2017

ये दिल क्या करे

गर यादें आज से ज़्यादा सुनहरी लगें , तो ये दिल क्या करे?

कल के सूखे पत्ते गुलाब से महकने लगे, तो ये दिल क्या करे?

यथार्थ को छोड़ कृर्तिमता दिलचस्प लगे , तो ये दिल क्या करे?

हक़ीक़त से ज़्यादा ख़्वाबों में बातें  होने लगे, तो ये दिल क्या करे?


जब इंतज़ार में उम्मीद के बदले खलिश लगे,  तो ये दिल क्या करे?

सब जानते हुए भी कोई अंजना लगे , तो ये दिल क्या करे?

साथ की बजाय दूरियों मिलने लगे, तो ये दिल क्या करे?

आप जिसकी मंज़िल थे , वो महफ़िलों में शिरकत करे , तो ये दिल क्या करे?



जब उनकी बातों में भी ख़ामोशी लगने लगे, तो ये दिल क्या करे?

स्वर जब न  सुनने  की उम्मीद से खामोश हो जाये, तो ये दिल क्या करे?

आँचल में  सोने वाले जब दामन बचा गुजरने लगे , तो ये दिल क्या करे?

साथ चलने का दम भरने वाले , रास्ते बदले , तो ये दिल क्या करे?

जो कभी सिसक उठते थे, आज आपकी उदासी पे हसें, तो ये दिल क्या करे?



आखों में जब ख़ुशी के बदले बौछार बहे , तो ये दिल क्या करे?

तन सोना चाहे और मन जागना चाहे , तो ये दिल क्या करे?

सबसे दूर कहीं अँधेरे सा खोना चाहे , तो ये दिल क्या करे?

जब मौत ज़िन्दगी से बेहतर लगने लगे , तो ये दिल क्या करे?


आँचल चौधरी