Saturday, May 10, 2008

aanchal


सागर में जो सैलाब आये तो तुम कहीं डर न जाना,

अपने आँचल में चुपा लुंगी तुम्हे

ऊंचायिओं से जो मंजिल ना दिखे तो तुम कहीं रुक ना जाना ,

अपनी आंखों से मंजिल का नजारा करा दूंगी तुम्हे

दुशमनों की नज़रें थाम ले तुम्हे तो तुम कहीं डर ना जाना ,

अपने काजल का टीका लगा दूंगी तुम्हे

हस्राते पूरी ना हो तो तुम मायूस हो naa jana ,
अपनी doooaon के phoolon से saja दूंगी तुम्हे