Wednesday, May 17, 2017

ये दिल क्या करे

गर यादें आज से ज़्यादा सुनहरी लगें , तो ये दिल क्या करे?

कल के सूखे पत्ते गुलाब से महकने लगे, तो ये दिल क्या करे?

यथार्थ को छोड़ कृर्तिमता दिलचस्प लगे , तो ये दिल क्या करे?

हक़ीक़त से ज़्यादा ख़्वाबों में बातें  होने लगे, तो ये दिल क्या करे?


जब इंतज़ार में उम्मीद के बदले खलिश लगे,  तो ये दिल क्या करे?

सब जानते हुए भी कोई अंजना लगे , तो ये दिल क्या करे?

साथ की बजाय दूरियों मिलने लगे, तो ये दिल क्या करे?

आप जिसकी मंज़िल थे , वो महफ़िलों में शिरकत करे , तो ये दिल क्या करे?



जब उनकी बातों में भी ख़ामोशी लगने लगे, तो ये दिल क्या करे?

स्वर जब न  सुनने  की उम्मीद से खामोश हो जाये, तो ये दिल क्या करे?

आँचल में  सोने वाले जब दामन बचा गुजरने लगे , तो ये दिल क्या करे?

साथ चलने का दम भरने वाले , रास्ते बदले , तो ये दिल क्या करे?

जो कभी सिसक उठते थे, आज आपकी उदासी पे हसें, तो ये दिल क्या करे?



आखों में जब ख़ुशी के बदले बौछार बहे , तो ये दिल क्या करे?

तन सोना चाहे और मन जागना चाहे , तो ये दिल क्या करे?

सबसे दूर कहीं अँधेरे सा खोना चाहे , तो ये दिल क्या करे?

जब मौत ज़िन्दगी से बेहतर लगने लगे , तो ये दिल क्या करे?


आँचल चौधरी

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