कभी जाने अनजाने , वो किस्से पुराने ,
यू हीं ज़हन में आ जाते हैं सताने ,
ले कर अपने साथ मुस्कुराने के बहाने ,
खट्टी -मीठी यादों के अनमोल खजाने |
कभी जाने अनजाने , वो किस्से पुराने ,
किसी बेबाक शाम , चाय की चुस्कियों में डूब जाने ,
ज़रूरतों- ज़िम्मेदारियों के बोझ तले , वो कहीं खोते यारों के घराने ,
कभी दोस्तों के संग गाया करते थे , अपनी दोस्ती के तराने ,
फिर से उसी मोड या नुक्कड़ से गुजरने पर , पुरानी बातों के पयमाने ।
कभी जाने अनजाने , वो किस्से पुराने ,
सदियों से बंद पड़े कोने में , समय की परत हटाने ,
वो चुप-चाप खामोशी से ख्वाब में खोते फ़साने ,
कभी इतेफ़ाक़ से, बस ऐसे ही अपने आप को दोहराने ,
एक दबे हुए एहसास को जिन्दा करते, लोहबान की भांति सुलगाने ।
कभी जाने अनजाने , वो किस्से पुराने ,
तेरे दूर होने पर भी , तेरे होने का इल्म कराने ,
आज भी वो शामिल हैं , चाहे बीते कितने ही ज़माने ,
किसी और में तेरी छवि देख कर , एक पल को रुक जाने ,
किसी अपने की याद में नयनों से रिमझिम बरसाने |
कभी जाने अनजाने , वो किस्से पुराने,
तनहाईयों को तनहा करते , गुदगुदाने हसाने ,
रुखी रोती रुसवाईयों में , रूठे दिल को मनाने ,
अकेलेपन को चीरते , निराश मन को समझाने ,
अँधेरे मन में प्रेरणा रूपी दिया जलाने |
कभी जाने अनजाने , वो किस्से पुराने,
गलतियों और उपलब्धियों के द्वारा सक्षम बनाने ,
घटनाओं के चक्र से परिपक्वता बढ़ाने ,
आज की परेशानियों को तजुर्बे से सुलझाने ,
अनुभव को बढ़ाते , थोड़ा और समझदार बनाने |
कभी जाने अनजाने , वो किस्से पुराने ,
यू हीं ज़हन में आ जाते हैं सताने ,
ले कर अपने साथ मुस्कुराने के बहाने ,
अच्छे - बुरे , खट्टे - मीठे यादों के अनमोल खजाने |
आँचल चौधरी