Tuesday, September 16, 2014

यूं ही ना जाने दो

                               
                                 “यूं ही ना जाने दो
आने वाले कल की फिक्र और बीते हुए कल के अफ्सोस में, तुम अपने आज को यूं ही ना जाने दो ।
किसी खास को पाने की ललक में, अपने आज के साथीयों की अवहेलना कर, उन्हे अपने से दूर ना जाने दो ।
कोई बड़ी उपलबधी पाने की अभिलाशा में, तुम जीवन की छोटी छोटी खुशिययों को ना जाने दो ।
अपनों के वात्सलय व स्नेह बरसाने की वो हर छोटी बड़ी कोशिश को, यूं क्रतज्ञहीन बन नज़रं-अंदाज़ं ना जाने दो ।

रोज़-मररा की भाग में दौड़ में, सर्प्रथम रहने की होड़ में, फुर्सत के चंद लम्हों को ना जाने दो ।
प्रति-स्पर्धा के इस दौर में ,छल छ्लावे के ज़ोर में, अपनी अमिट मुस्कान को चेहरे से  ना जाने दो ।
बाहर की आंधी और तूफानों के झोंकों से झुंझलाकर, अपने अंदर के संयम को ना जाने दो ।
झूठ, फरेब और धोखे का इस्तेमाल तो दूसरों के हाथ में है, पर खुद के ज़मीर् को ना जाने दो ।

कितने ही सफल व समरिध्द हो जाओ ज़िंदगी में मेरे दोस्त, अपने मधुर व्यव्हार व सओम्य्ता को ना जाने दो ।
जीत-हार तो मानो दिन रात की तरह आते रेहेंगे, बेहतर बनने के लिये हार से मिले अनुभव को ना जाने दो ।
तुम कल हारे,बार-बार हारे,हर बार हारे तो क्या, फिर से एक बार कोशिश करने के होसले का ना जाने दो ।
दरवाजे-दर- दरवाजे बंद मिले तो कोई बात नही राहगीर, नये उत्साह से दस्तक देने की उम्मीद को ना जाने दो ।

इस दुनिया में सब कुछ ठीक नही है,प्रयत्न्शील बन एक बेहतर विरासत छोड़् के जाने के विचार को ना जाने दो ।
सोते हुए सपने तो रोज़ ही देखते हैं,अथक परिश्रम कर, अपने सपनों को खाली ना जाने दो ।
नि:संदेह चूनौतीयों से भरा है जीवन, निरंतर आगे बढाते रहो अपने कदम ।
चूनौतीयों को चूनौती देते हुए समय के प्रवाह संग बह जाओ तुम ,
मायूस हो कर तुम कभी भी अपने आत्म-विश्वास को ना जाने दो । 



आँचल चौधरी

3 comments:

Unknown said...

It's nice collection of thoughts.. a good way to express self.
More like a prose then a poetry.. Appreciable reflection on life.

aanchal choudhary said...

Thank You Ravi sir !!!!!!!!!!!!!!

Anonymous said...

Kya baat hai di :) bahut badhiya :) ye poem itne dino tak meri aankhon se kaise bachi rahi :D