Monday, December 15, 2014

तो सोच लो

यदि आज कहीं " निर्भया" बनी नारी ,
तो सोच लो , एक बार फिर,
कल कहीं  इन्ही हैवानों का शिकार न हो बेटी तुम्हारी  !

गर राहों और गलियों में छेड़ी जाती है नारी
तो सोच लो , कल को राह गुज़रते
इन्ही रास्तों पर न सिसकती मिले बेटी तुम्हारी !

यदि मनचले आशिक़ों का शिकार है नारी ,
तो सोच लो , किसी पथ पर ,
कैब , बस या ट्रैन में न बैठी हो बेटी तुम्हारी !

नोची जाती है वो नन्ही परी प्यारी ,
तो सोच लो , कल कोई
दरिंदा न कुचल दे गुड़िया तुम्हारी !

एसिड से कुरूप की जाती है नारी ,
तो सोच लो , कल किसी सरफिरे
के गुस्से से दागदार न हो बेटी तुम्हारी !


रिश्तों और मर्यादा को ताक पर रखते हुए ,
जब छली जाती है कोई बेचारी ,
तो सोच लो , कल को  न हो  वो कोई तुम्हारी  !

कोख में ही मार दी जाती है दुलारी ,
तो सोच लो, कल कहीं न मिले,
 किसीको भी अपने  बेटे के लिए बहू रानी !


 गर देह -व्यापार में  जबरन  झोंकी जाती है नारी ,
तो सोच लो , की कल किसी  बाजार में ,
न बैची जा  रही हो बेटी तुम्हारी  !


यदि प्रताड़ित है परिवार में   नारी ,
तो सोच लो , ऐसे ही किसी ,
परिवार की बहू  न बन जाये बेटी तुम्हारी !

गर  किसी दफ्तर में शोसित है नारी ,
तो सोच लो , कल उसी
कुर्सी पर न बैठी हो बेटी तुम्हारी !
 

झुलसती है गर दहेज़ की आग में नारी ,
तो सोच लो , कल इसी
अग्नि में न लिपटी मिले बेटी तुम्हारी !

इन शब्दों को  यूँ न भूला देना ,
जागे जो ज़ज़्बात हैं यूँ ही न  सूला देना ,

हमे ही बदलना है इस दूषित मानसिकता को ,
संकुचित सोच से  बचाना है अस्मिता को !



उठे गर हाथ कभी तो  मदद के ही हाथ  हो ,
सुदृढ़ सोच , सदाचार व  संस्कारों का साथ हो !

कहीं  भी न फिर अन्याय की बात हो ,
कभी भी न १६ दिसंबर जैसी रात हो !!!!

न करे नारी का अपमान , न अपने आस पास होने दे ,
 एक जुट हो जाये , कसी भी नारी के आत्म-विश्वास को न  खोने दे !


धरोहर हैं ये हमारे समाज की ,
नीव है ये देश के विकास की ,
ऐसी विचार धारा  का प्रचार करे ,
की सदा गर्व  से आगे बढ़े
बेटी मेरी हो या फिर तुम्हारी !

आँचल चौधरी

No comments: