भीगी बरसात में
आओगे पहली मुलाकात में I
बादल गरजा, बिजली कडकी , भीगी मै बरसात में I
घटाओं ने रुख बदला और आ गये हम तुम साथ में I
भीनी फिजाओं में उड़ता आँचल पकड़ा तुमने हाथ में I
यू ही शर्मा जाती हूँ ये सोच कर कि कैसे तुम पास
कैसा ये सावन छाने लगा है, कि अरमान मचलते हैं ऐसे हालात में I
कैसे तुम्हे पास बुलाऊं कि मन की शेरनी बैठी है इसी घात में I
ये कैसा जादू है तुम्हारा की ढूढने लगी हूँ तुम्हे हर बात में I
तेरी याद में इस कदर डूबी हूँ कि जैसे अँधेरा रात में I
बादल गरजा, बिजली कडकी , भीगी मै बरसात में I
घटाओं ने रुख बदला और आ गये हम तुम साथ में I
आँचल चौधरी
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