Monday, March 8, 2010

याद
क्या बतलाऊं तुम्हे कि
तुम्हे कितना याद करती हूँ I

हर आहट पर ठहर जाती हूँ ,
कि लगता है तुम आने वाले हो I
शाम होते ही सवार जाती हूँ ,
कि लगता है तुम आने वाले हो I

पलके भी नहीं झपंकने देती हूँ,
कि लगता है तुम आने वाले हो I

रात सोते हुए हुड़क जाती हूँ
कि लगता है तुम आने वाले हो I

क्या बतलाऊं तुम्हे कि
तुम्हे कितना याद करती हूँ I


हर ज़र्रे से पुचा करती हूँ
कि क्या तुम आने वाले हो I
कण -कणमें ढूंढा करती हूँ
कि क्या तुम आने वाले हो I
सूरज की पहली किरण से सवाल करती हूँ
कि क्या तुम आने वाले हो I
रात की ख़ामोशी में सोचा करती हूँ

कि क्या तुम आने वाले हो I


क्या बतलाऊं तुम्हे कि
तुम्हे कितना याद करती हूँ I

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