Sunday, November 20, 2016

जाते जाते


कभी खामोश हो जाऊं तो ,
शक मुझ पर नहीं , सवाल अपने आप से करना |

दूर जो कर लूँ खुद को तुमसे ,
मेरे चले जाने का अफ़सोस बिलकुल भी न करना |

जिसने सब कुछ माना तुमको,
मज़ाक में भी उसके एहसासों को नज़रअंदाज़ न करना |

जो बेहिसाब प्यार की दौलत दें,
उसे वक़्त न दें कर, समय को कही और बर्बाद न करना |

जिसे परवाह नहीं उसके लिए ,
अपनी चाहतो और ख्वाइशों का निवेश न करना |

बातों से बहलाना तो ठीक है,
कितना कड़वा ही सही पर, सच बताने से न डरना |

एक दूजे की दुनिया थे हम कभी,
भीड़ या महफ़िल में अकेलापन महसूस न करना |

प्यार से कह दोगे, तो हमेशा के लिए चली जाऊंगी,
मेरे इस मासूम दिल से खिलवाड़ न करना |

मीठी यादों में काट जाएगी ज़िन्दगी ,
फरेब और धोखे की तलवार से वार न करना |


आज लफ्ज़ साथ नहीं हमारे,
किसी के वादों पर ऐतबार न करना |

बहुत कोशिश की कि न जाऊं दूर,
जहाँ ठहराव न हो वहां , इंतज़ार न करना |

दिल आज खुद को समझाता है कि-
किसी और से वफ़ा की उम्मीद न करना |

आँचल चौधरी

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