Sunday, November 20, 2016

ज़ज़्बा - ज़िन्दगी की हार नहीं होती |



तुम  हार के मत बैठ जाओ ,
एक नाकामयाबी से ज़िन्दगी की हार नहीं होती |

मेहनत  से सींचो जीवन   को  ,
बिना  सींचे जीवन  की बगिया में बहार नहीं होती |

चलना  कभी मत छोड़ना  यारों ,
निकलो सफर पर बेधड़क, बारिशें हर बार नहीं होती |

नाउम्मीद हो कर लौट न जाना ,
खटखटाओ क्योंकि हर दरवाजे के पीछे दीवार नहीं होती |

मौजे  तो अपनी मौज  में है ,
हासिल न  होता साहिल जब तक धुन सवार नहीं होती |

मायूसी  को  दिल में न आने  दो ,
दिल से की गयी कोशिशें कभी बेकार नहीं होती |

मीलो का सफर रोज़ चलने से कटता है ,
एक दिन में मंज़िल तक पहुंचा दे, ऐसी रफ़्तार नहीं होती |

पोंछ लो खुद आंसूयों को,
गम की नुमाईश से मायूस हर बाजार नहीं होती |

ख्वाईशों को पंख लगा के उड़ने दो,
सिर्फ सोच  कभी भी औज़ार नहीं होती |

बस  अपनी बुनियाद मज़बूत  रखना  ,
यूँही तपिश या आँधीयों से ईमारतें बीमार नहीं होती |

खुद  से बेहतर  बन  जाओ  बस,
दूसरों से मुकाबले से अपनी दुनिया गुलज़ार नहीं होती |

भरोसा  रखना खुद पर हमेशा ,
आत्म -विश्वास  की दीवार  में दारार नहीं होती |

आँचल चौधरी

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