Monday, September 17, 2012

तुम मेरे क्या हो ?





तुमसे कैसे कहूँ कि तुम मेरे क्या हो !
होटों पर जो खिल जाये वो हसी हो,
बालों में जो हिल जाये वो कली हो,
नींदों को जो सजायें वो सपना हो,
हाले- दिल जिसे सुनाये वो अपना हो |

तुमसे कैसे कहूँ कि तुम मेरे क्या हो !
कभी पास कर तुम हसातें हो,
तो पल मिएँ दूर जा कर सताते हो,
जो रूठ जाऊं तुमसे तो मनाते हो,
आपनी की बातों के जाल में फसातें हो |

तुमसे कैसे कहूँ कि तुम मेरे क्या हो !
कभी दूर देखूं तो तुम पास हो,
कभी पास देखूं तो तुम एक एहसास हो,
धरती पर देखूं तो तुम आकाश हो,
दिल जिसे गुन-गुनाए वो सुरीला साज़ हो |

तुमसे कैसे कहूँ कि तुम मेरे क्या हो !
मैं एक मोबाइल तो तुम मेरे सिम हो,
मैं धरती तो तुम बारिश रिम-झिम हो,
मै कंप्यूटर तो तुम हार्ड-डिस्क हो,
किसी और के हो गये तो
इस दिल के लिए रिस्क हो |


तुमसे कैसे कहूँ कि तुम मेरे क्या हो !






No comments: