तू जज़्बात का वो दरिया है , जिसका कोई साहिल नहीं |
नूर-इ-रूह में बस्ता है , पर मेरी ज़िन्दगी में शामिल नहीं |
एक उफ़ सी है सीने में कि क्यूँ तू मुझे हासिल नहीं |
तकदीर के खेल कह लो या फिर शायद, मै तेरे या तू मेरे काबिल नहीं |
महफ़िल भी है , मंज़र भी, चेहरे पर हसी , दिल बंज़र भी |
एक खामोश सैलाब, होठो पर सजी मुस्कान , आँखों में समंदर भी |
हर मौसम सर्द , बे -पनाह दर्द, घाव दीखते नहीं जो हैं अन्दर भी |
तेरी ख़ामोशी , तेरी बेरुखी के सीने में चुभते खंज़र भी |
क्यूँ है तू जुदा सा, मुझसे यूँ खफा सा, मेरे मन का सूरज है बुझा सा |
आँखों में एक तिनका छुपा सा, तेरे बिना मेरा स्वर है रुंधा सा |
जीने में खलिश, आँखों में तपिश , जाती नहीं तुझे पाने की कशिश |
कभी दूर कभी पास , तेरे वजूद का एहसास ही है मेरे जीने की आस |
कितना भी बहला लूँ , कही भी दिल लगा लूँ , सब लगता है बकवास |
मेरा सब कुछ तू ही है , मेरे लिए तू है सबसे अलग , सबसे ख़ास |
जज़्बात का तू वो समन्दर, जिसका कोई साहिल
नहीं |
बस्ता है नूर- ए -रूह में, पर ज़िन्दगी में
शामिल नहीं |
एक उफ़ सी है सीने में कि आख़िर मुझे क्यूँ हासिल नहीं |
तकदीर का खेल है ये शायद,मै तेरे या तू
काबिल नहीं |
महफ़िल भी है,
वो मंज़र भी, चेहरे
पे हँसी, दिल
बंज़र भी |
सैलाब है खामोश होठों पे आँखों में उठते समंदर भी |
मौसम सर्द , बे -पनाह दर्द,
दिखते नहीं, हैं
घाव अन्दर भी |
ख़ामोशी,
और तेरी बेरुखी के, है चुभते हमेशा खंज़र भी |
तकदीर का खेल है ये शायद, मै तेरे या तू काबिल नहीं |
क्यूँ है यूँ जुदा सा,तू मुझसे क्यूँ है खफा सा यूँ मुझसे |
छाया है ये घना अँधियारा, सूरज बुझा सा
क्यूँ मुझसे |
आँखों में चुभता है
मेरी, तिनका छुपा है जाने कबसे |
क्यूँ कौन कब सवाल कैसे, ऐसे शिक़वे गिला
हैं रब से |
तकदीर का खेल है ये शायद, मै तेरे या तू
काबिल नहीं |
जीने में खलिश, आँखों में तपिश, जाती
नहीं तुझे पाने की कशिश |
थे अपने भी कुछ हंसी सपने,पर कर रहे ग़म की
परवरिश
कितना भी अब मैं बहला लूँ ,क्या और कहीं भी
दिल लगा लूँ
मौसम ये आता और जाता,पर थमती नहीं मेरी बारिश
तकदीर का खेल है ये शायद, मै तेरे या तू
काबिल नहीं |
बस्ता है नूर- ए -रूह में, पर ज़िन्दगी में
शामिल नहीं |
एक उफ़ सी है सीने में कि आख़िर मुझे क्यूँ हासिल नहीं |
तकदीर का खेल है ये शायद, मै तेरे या तू
काबिल नहीं |
मै तेरे या तू काबिल नही, काबिल नहीं,
तू नहीं |

5 comments:
Nice start. Keep it up dear. :)
Sweet words , keep it my modern potess..:-)
Par lagta hai dard ko badi hi gahera utar kar piya hai tumne...
Is it past love ?
बहुत ही बदिया लिखा है आपने. अत्यंत मार्मिक और दिल को छू लेने वाली पंक्तिया हैं ये. आपको इसके लिए बहुत बहुत बधाई. आशा करता हूँ की आगे भी आप ऐसी ही कविताये लिखती रहेँगी.
आपका दोस्त और शुभचिंतक
अंकित
zazbaato se labrez, bahut hi umda
दिल की बातें दिल ही जाने ..
हम ना बोलें,हम अंजाने ॥
very nice and heart touching poem ...
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