Tuesday, March 29, 2011

अश्क में डूबा दिल




क्यूँ अश्क में है डूबा दिल ,

हासिल न हुआ जिसे समझा साहिल ,

कुछ ऐसा था वो मेरा कातिल ,

की छोड़ा उसने मुझे ना किसी काबिल I



क्यूँ अश्क में है डूबा दिल ,

इन राहों की ना थी कोई मंजिल ,

फिर भी चल पड़े हम क्यूँ साथ मिल ,

अब क्यूँ तन्हा रोता है दिल ,

आखों से बरसते मोती झिलमिल I


क्यूँ अश्क में है डूबा दिल I

जीवन सूना वीरान बंज़र ,

ज़हन में है साथ बीता मंज़र ,

सीने में चुभता यादों का खंज़र ,

आसुओं के हैं बहते सैलाब समंदर I



क्यूँ अश्क में है डूबा दिल I

बदल डालूं ऐसा मशीनी पुर्जा नहीं,

खुद को संभालूं अब इतनी मुझमें ऊर्जा नहीं,

पर कब तक यूँ ही जीना होगा,

ये अश्रु सैलाब तो मुझे पीना ही होगा,

दूर जाने की चोट अन्दर ही अन्दर दुखती है,

आगे बढ़ना होगा, ये ज़िन्दगी कहाँ रूकती है I



क्यूँ अश्क में है डूबा दिल I

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